
माँ को समर्पित
माँ
तू सुन रही है न
मेरी आवाज़
अपने
जिगर के टुकड़े की आवाज़
तू समझती है
मै बड़ा हो गया हूँ
भूल गया हूँ
मै
अपने बचपन की सारी बात
नही माँ ,नही
मुझे सबकुछ याद है !
जब तुम मुझे
गोद में उठाकर
रात में छत पर जाती थी
मै तुमसे कहता था
'चाँद ला दो न ,माँ
चाँद ला दो न ,माँ '
फ़िर
तुम मुझे बहुत समझाती थी
तुम मुझे बहुत प्यार करती थी
इसलिए की
मै चाँद को भूल जाऊं
पर मै नहीं भूल पाता था
उसे
मै तुमसे फिर कहता था
' चाँद ला दो न ,माँ
चाँद ला दो न, माँ '
तब तुम कहती थी
ठीक है
अभी सो जा, कल ला दूँगी
लेकिन मै नहीं मानता था
मै कहता था
अभी ला दो न ,अभी ला दो न माँ
मै तुम्हे बहुत परेशान करता था
अंत मे
तुम मुझे पिटती थी
खूब पिटती थी
मै खूब जोड़-जोड़ से रोता था
पर
उस चाँद को नहीं भूल पाता था
फिर
तुम मुझे
लोड़ी सुनाते-सुनाते ,थपकियाँ देते-देते
सुलाने की कोशिश करती थी
मै भी चाँद को याद करते-करते
रोते-रोते
सो जाता था
और फिर
सबकुछ भूल जाता था
उस चाँद को भी
उस समय मुझे समझ मे नहीं आती थी
तुम्हारी बात
पर अब समझता हूँ
इतना आसान नहीं है
चाँद को पाना !
माँ
तू सुन रही है न
मेरी आवाज़
हाँ ,सुन
जानती है माँ
एक लड़की मुझे बेहद पसंद है
मै उसे बेहद प्यार करता हूँ
कभी परेशान नही करता हूँ उसे
पर
मै उसको नापसंद हूँ
वह मुझसे नफरत करती है
पता नही
क्यो ?
ऐसा क्या नही है ?
मुझमे
पर, माँ
मुझे अच्छी तरह से याद है
' तुम्हारी नजर मे मै सबसे अच्छा था ,अच्छा हूँ
तुम्हारी नजर मे मै सबसे खुबसूरत था ,खुबसूरत हूँ
तुम मुझे राजा कहकर पुकारती थी ,पुकारती है
तुम मुझसे अलग होकर नहीं रह पाती थी,नहीं रह पाती है
तुम मुझसे बेहद प्यार करती थी,करती है '
एक बात बोलू माँ
'उसे देखने के लिए, अपनी आँखे दे दे न
उसे बोलने के लिए अपनी आवाज़ दे दे न
उसे अपनी हृदय दे दे न '
माँ ,अबतक तुने बहुत कुछ दिया
जितना माँगा उससे कहीं ज्यादा दिया
माँ, उस लड़की को बोल न
समझा न उसे
उसे बोल न
मेरा लाडला तुम्हे बहुत चाहता है
वह तुम्हारे बिना नहीं जी सकेगा
अगर वह नहीं माने, मुझे खूब डांटना
तूम मुझे खूब पीटना माँ ,खूब पीटना
मै रोना चाहूँगा माँ
मै जी भर के रोना चाहूँगा
फिर
तुम मुझे अपने गोद मे सुलाकर
मुझे लोड़ी सुनाना ,मुझे थपकियाँ देना
लोड़ी सुनते-सुनते ,उसे याद करते-करते
शायद नींद आ जाए
और
मै सबकुछ भूल जाऊं
और
मै समझ जाऊं
इतना आसान नहीं है
किसी को अपना बनाना
तुम्हारा प्यार किसी ओर में तलाश करना !
माँ
तू सुन रही है न .............................................
माँ
तू सुन रही है न .............................................
14 comments:
प्यारी माँ के लिए इतने शब्द,इतनी भावनाएं ही
उसे निहाल कर जाती हैं.........
कभी भूलना भी नहीं,............
माँ चाहती तो चाँद ला सकती थी,पर चाँद लेकर क्या करते
ज़िन्दगी के मायने तो कुछ और थे........
माँ की निगाहों में जो तुम हो ,उस निगाह की खोज करो,
जो नापसंद करे,समझो वह तुम्हारे लायक नहीं........
फिर दिल का सुकून माँ की लोरी,माँ की god बन जायेगी !
माँ-माँ होती है,उसके जैसा कोई नहीं हो सकता
मैं भी माँ जैसी हो सकती हूँ,
है ना? यानि माँ सी
bhaut sachhi baat likhi hai
maa jab bhi main thak jaati hoon yaad aati hai
maa se baat karke bhaut sakun milta hai
maa kya nahi kar sakti apne bachhon ke liye
bhaut bhaut sachhi baat hai
अद्भुत ,भावातीत , मर्मस्पर्शी ......
wah..!!
achha likha hai aapne..!!
waah....kisako naheen chaahiye aisa beta....har maan tumhen chaahegee....
bahut bhaav-poorn rachna....
badhaee
sasneh
gita
PRIYA VED PRAKASH SINGH
APKEE "MAAN" KAVITA MAAN JASEE SNEH BHAREE HAI...MAAN SUN RAHEE HO NA! PANKTIYAAN BAR-BAR MAAN KE PASS LE JATEE HAIN.
ESEE KAVITAAYEN , HRIDYA SE SARJIT KAVITAAYEN HEE HRIDYA KO CHHTEE HAIN.
*ASHOK LAV
dil ko chu gai......
really vry touching
maa ka dil, maa ki awaaz aur maa ki ankhe to maag lee lekin ma aka ahsaas usme kahan se laaoge....???
dil ko chhua apki inhi lines ne..jisne ma ase ye sab manga apne..lekin ye bhi sach hai ma aka ahsas koi nahi le sakta ..maa aur bache ka rista ek yaise ahsas ka bandhan bhi hai jise ek maa hi samjh skati hai...
aur rachna to itni ahsas bhari hai ki dil hua ro dun ...
bahut khub...supareb
माँ तो बस माँ होती है
बहुत प्यार और सम्मान है एक-एक शब्द में
और तस्वीर भी......
मर्मस्पर्शी ......
bahut maarmik rachna...!
Dil ko chu gai.. aur Maa ko jo samaan diya us ke liye sat sat NAman....Golu.
dil ko chu leni wali rachana hai ..... sach he to hai maa to maa he hoti hai...
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